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Success Story: मां-बाप के सपनो के लिए बने IAS, अपने सपनों के लिए छोड़ी दी नौकरी, फिर शुरू किया ये…

Success Story: कई युवाओं ने आईएएस की नौकरी के लिए प्राइवेट नौकरी छोड़ दी और यूपीएससी की परीक्षा पास कर यह प्रतिष्ठित सेवा हासिल की। भारत में प्रशासनिक सेवाओं को बड़े सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी रहे हैं जिन्होंने आईएएस बनने के बाद इस नौकरी को बिजनेस के लिए छोड़ दिया। हालांकि ऐसे लोगों की संख्या कम जरूर है, लेकिन इससे भी ज्यादा हैरानी की बात यह है कि ये लोग आज कारोबार में बुलंदियों को छू रहे हैं। बालगोपाल चंद्रशेखर उन चुनिंदा शख्सियतों में से एक हैं।

Success Story

पूर्व आईएएस अधिकारी बाला गोपाल चंद्रशेखर की सफलता की कहानी कई युवा उद्यमियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है। भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी बनने के अपने माता-पिता के सपनों को पूरा करने के बाद, चंद्रशेखर ने अपनी प्रवृत्ति का पालन किया और कॉर्पोरेट जगत में प्रवेश करने के लिए महज 30 साल की उम्र में सिविल सेवा छोड़ने का फैसला किया। खास बात यह है कि उन्होंने बिजनेस की दुनिया में भी खूब नाम कमाया।

6 साल में दिया IAS से इस्तीफा

केरल में जन्मे बालगोपाल ने 1976 में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास की। प्रशिक्षण के बाद उन्हें मणिपुर कैडर मिला लेकिन 1977 बैच के आईएएस अधिकारी बालगोपाल चंद्रशेखर ने महज 6 साल बाद 1983 में आईएएस की नौकरी से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उन्होंने भाई सी पद्मकुमार के साथ मिलकर अपनी खुद की कंपनी टेरुमो पेनपोल शुरू करने का फैसला किया, जो बायोमेडिकल उपकरण बनाती है।

महज 6 साल की सेवा के बाद आईएएस अधिकारी के पद से बालगोपाल चंद्रशेखर के इस्तीफे की एक बड़ी वजह थी। उनका निर्णय तिरुवनंतपुरम में श्री चित्रा तिरुनल इंस्टीट्यूट फॉर मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी में एक आर एंड डी सुविधा की यात्रा से प्रेरित था, जहां वैज्ञानिकों ने स्वदेशी रूप से रक्त बैग विकसित किए।

व्यवसाय से भी सन्यास ले लिया

बालगोपाल चंद्रशेखर की कंपनी पेनपोल ने 1987 में 1 करोड़ रुपए की लागत से ब्लड बैग बनाना शुरू किया था। चंद्रशेखर ने 1999 में जापानी कंपनी टेरुमो के साथ एक संयुक्त उद्यम बनाकर इस कंपनी को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया और भारत के सबसे बड़े ब्लड बैग निर्माता, टेरुमो पेनपोल की स्थापना की।
चंद्रशेखर ने 2012 में एक जापानी भागीदार को कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बेच दी और 26 साल के सफल व्यावसायिक कैरियर से सेवानिवृत्त हुए। 2015 और 2021 के बीच, बालगोपाल चंद्रशेखर ने फेडरल बैंक में अध्यक्ष और स्वतंत्र निदेशक के रूप में कार्य किया।

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