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FASTag यूज करने वालो के हुई मौज, फास्टैग में जमा पैसों पर ब्याज देगा बैंक दिशा निर्देश जारी, कैसे मिलेगा ब्याज यहाँ देखें

FASTag Fixed Deposit Rate: फास्टैग जमा पर बैंकों को ब्याज भुगतान का आदेश देने की मांग पर हाईकोर्ट ने गुरुवार को केंद्र सरकार और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई से पहले उनका जवाब मांगा है। अगर आपको लग रहा है तो आप जान लीजिए कि रिचार्ज कराने के बाद जब तक आप पैसे का इस्तेमाल नहीं करते, तब तक उसमें पैसा रहता है। फास्टैग पर ब्याज भुगतान और कार्ड में जरूरी न्यूनतम राशि की मांग वाली याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने एनएचएआई और केंद्र से जवाब मांगा है। याचिका में कहा गया है कि बैंकों को फास्टैग में जमा राशि पर ब्याज देने का निर्देश दिया जाए। मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने एक याचिका पर NHAI और सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय को नोटिस जारी किया।

FASTag Fixed Deposit Rate

अगली सुनवाई के लिए 10 अगस्त निर्धारित की गई है

कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि फास्टैग जारी करने से हजारों करोड़ यात्री एनएचएआई या सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय को कोई लाभ दिए बिना बैंकिंग प्रणाली में आ गए हैं। कोर्ट ने इस संबंध में जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। अगली सुनवाई के लिए 10 अगस्त का दिन निर्धारित किया गया है। आवेदन में बिना फास्टैग वाले वाहनों को दोगुना टोल टैक्स देने के नियम को भी चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि यह नियम भेदभावपूर्ण, मनमाना और जनहित के खिलाफ है क्योंकि यह एनएचएआई को नकद भुगतान के लिए दोगुनी दर से टोल वसूलने का अधिकार देता है।

30000 करोड़ से ज्यादा बैंकिंग सिस्टम से जुड़े

याचिकाकर्ता रवींद्र त्यागी की ओर से पेश अधिवक्ता प्रवीण अग्रवाल ने अर्जी में कहा कि फास्टैग सेवा शुरू होने के बाद बैंकिंग व्यवस्था में 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि जोड़ी गयी है। याचिका में कहा गया है कि अगर इस आंकड़े पर 8.25 फीसदी सालाना की सावधि जमा (एफडी) दर लागू की जाए तो एनएचएआई या सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय हर साल 2,000 करोड़ रुपये से अधिक का मुनाफा कमाएगा।

याचिका में कहा गया है, ‘फिलहाल इस पैसे का इस्तेमाल बैंकों/वित्तीय संस्थानों द्वारा मुफ्त में किया जा रहा है। इस राशि पर ब्याज या तो एनएचएआई/सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय या यात्रियों का है और इसका उपयोग सड़क/राजमार्ग/यात्रियों के लाभ के लिए किया जाना चाहिए। याचिका में फास्टैग के ब्याज से मिलने वाली राशि के लिए प्रशासन को ‘यात्री कल्याण कोष’ नाम से एक अलग फंड तैयार करने का निर्देश देने की भी अपील की गई है।

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